धनदेवी महालक्ष्मी वंदना

 [ ]
 
          जय समुद्रजा   जय  कमलनैनी , जय  विष्णुप्रिया  चंद्राननी
 
 
       मायाप्रदाती      सुख प्रदाती ,   जय जगत नारायण  ,संगिनी ।
 धन ईश  जय   बैभव प्रदाती  ,    जय   सुयश   प्रदाती पदिमिनी।
        तम मैंटनी       करनी उजाला ,    जय जगमग  झिलमिल रोशनी ।
    नमो     नमो      माँ प्रभुता दायिन      जय   नमो नमो  हरि  अंकनी ।
 
भावार्थ :——-      
हे समुद्र की पुत्री ,हे कमल जैसे नेत्रों वाली आपकी जय हो            ।
    हे भगवान विष्णु की प्रिय ,चंद्रमा जैसे मुख वाली आपकी जय हो ।
      हे संसार मैं माया  प्रदान कर  देने वाली ,सुख प्रदान करने वाली
आपकी जय हो  ।  और संसार मैं सुयश देने वाली   [   ,कीर्ति देने वाली   ]
  आपकी    जय        हो      ।   हे धन की ईश्वर , हे संसार मैं बैभव ,
प्रदान करने वाली    तुम्हारी   जय   जय हो     ।    हे संसार के नारायण
श्रीविष्णु की संगिनी आपकी जय हो     ।  जीवन के अंधकार को समाप्त
करने वाली , हे उजाला करने वाली     , [ जीवन मैं प्रकाश फ़ैलाने वाली ]
, आपकी जय हो     ।  सारे संसार को अपने अलोक ,प्रकाश से जगमगाने
वाली आपकी बारम्बार जय हो । हे संसार मैं प्रभुत्व जमवाने  वाली माँ
आपकी बारम्बार जय हो ,बारम्बार नमस्कार है , ।
  हे भगवान के हिरदय से लगने वाली आपको बारम्बार नमस्कार है ।
      ,आपकी जय जय कार है ।
 
जय समुद्रजा जय कमलनैनी , जय विष्णुप्रिया चंद्राननी        
 
  [    ]
खड़ग गदा कर  आयुध धारी  , जय  जगत  पापीन   निपटनी      
मनुज  दनुज सुर  पूजें    तोही  ,  जय  सर्व  पाप          विनाशनी   
 दंड  प्रदाती, दुष्ट   जनन  तू   ,  जय   नमो  नमो     संहारिनी      
नमो  नमो  माँ  गरुणा  रूढा ,   नमो नमो  जय     नारायिनी    
 
 भावार्थ :——-  
   
हे समुद्र की पुत्री आपकी जय हो ,हे कमल जैसे नेत्रों वाली आपकी
जय हो ।    हे भगवान विष्णु की प्रिय ,   चंद्रमा जैसे    मुख वाली
  आपकी  जय हो । -हे हाथ मैं तलवार ,गदा ,तथा हथियार रखने
वाली ,तथा संसार के पापियों से निपटने वाली आपकी जय हो ,
जय हो       हे लक्ष्मी माँ तुम्हें मनुष्य ,दैत्य , देवता  सभी पूजते हैं
हे समस्त पापों का नाश करने वाली माँ आपकी जय हो   ।   दुष्ट
मनुष्यों को दण्ड प्रदान करने वाली ,आपकी जय हो  हे  संहारिणी
 देवी आपको नमस्कार है नमस्कार है ।
  हे गरुण पर सवारी करने वाली माता लक्ष्मी हे नारायणी आपको
नमस्कार है       नमस्कार है ,आपकी जय हो ।
जय समुद्रजा  जय कमलनैनी   जय  विष्णुप्रिया   चंद्राननी    
 
 
 
   
  [   ]

 

 

 

 

             हिरण्यवर्णी   रश्मिरूपिणी         , जय  सतरज योगप्रदायिनी                        
 मान प्रदाती  धर्मप्रदाती           , जय धर्मरूपिणी     धर्मिणी             
 माला माल   क्षणिक  एक   करनी  जय  यौतुक  थार भराबनी  
नमो  नमो     धन देवी      तेरी  जय  नमो  नमो  दिन बदलनी।    
 
भावार्थ    :    —– 

 

 

  हे समुद्र की पुत्री आपकी जय हो ,हे कमल जैसे नेत्रों वाली
आपकी जय हो    ।      हे भगवान विष्णु की प्रिय  चंद्रमा
जैसे मुख वाली आपकी जय हो। हे स्वर्ण रूपी ,प्रकाश रूपिणी
हे सत्य , राज ,तथा योग प्रदान करने वाली  आपकी जय हो ।
   हे मान प्रदान करने वाली ,हे धर्म प्रदानकरने वाली  हे धर्म
का साक्षात् रूप ,हे धर्मानुसार विचरने वाली आपकी जय हो ।
   हे एक क्षण मैं धन माल से भंडार भरने वाली ,संपत्ति से
घर को पारी पूर्ण करने वाली आपकी जय हो  । हे धन की
देवी आपकी  नमस्कार है नमस्कार है,  हे दिन बदलने वाली
आप  नमस्कार है  नमस्कार है।आपकी  जय जय हो ।
जय  समुद्रजा जय  कमलनैनी   जय  विष्णुप्रिया  चंद्राननी ।
                                
 
 
     [   ]
नमो नमो माँ  जगदाधारी  जय परमपूज्य  सुरलोकनी   
 पदमावती त्रिभुवनजननि माँ  जय वेदत्रयी शुभरूपिणी   
आनंदिनी अनंतनिनी माँ जय ऐश्वर्यनी    प्रमोदिनी    
 नमो नमो हे मात दयालू  जय नमोनमो कमलासनी    
 
भावार्थ    :    —– 

 

 

 
हे समुद्र की पुत्री आपकी जय हो ,हे कमल जैसे नेत्रों वाली आपकी
जय हो  ।     हे भगवान विष्णु की प्रिय ,      चंद्रमा जैसे मुख वाली
आपकी जय हो     ।   हे जगत की आधार माता लक्ष्मी   आपको
नमस्कार है ,नमस्कार है   ।  हे     तीनों   लोकों             की
 जननी    पद्मावती   आपकी   जय हो ।  तीनों         वेदों        मैं
   शुभ रूप    मैं      वर्णित      आपकी   जय     हो ।  हे    मां  आप
     आनंद प्रदान करने वाली हो , तुम          अंतहीन   हो  ।  हे संसार
   मैं       प्रमोद    फ़ैलाने    वाली   प्रमोद  की  देवी आपकी जय हो ।
   हे    दया     करने     वाली   माता        आपको
 नमस्कार   है  नमस्कार है ।
  हे कमलासन  मैं  बैठनेवाली आपकी  जय  हो । आपको  नमस्कार
है  नमस्कार है ।
 
जय समुद्रजा जय कमलनैनी जयविष्णुप्रिया   चंद्राननी  
        [    ]
गुणहीन नर गुणवान करनी   जय दया  बूंद   बरसामनी  
हरी प्रिया जय हो तुम्हारी जय सोम भगनि हरिभामिनी
नमो नमो हे सुरेश्वरी  माँ   जयनमो नमो दुख  नाशनी    
नमो नमो भय मुक्त करनी  जयप्रचंडिनी  मद मण्डिनी    
 
                     
 
भावार्थ    :    —–

 

 

  
हे      समुद्र      की     पुत्री      आपकी     जय     हो ,हे    कमल
जैसे   नेत्रों   वाली   आपकी जय हो   ।      हे    भगवान    विष्णु
  की   प्रिय ,      चंद्रमा    जैसे   मुख वाली     आपकी   जय हो  ।
  हे     महा लक्ष्मी    माता    तुम    निर्गुण  ,बिना किसी अच्छाई
के मनुष्य को गुणवान बना सकती हो    हे   दया बून्द   बरसाने
वाली  आपकी  जय  हो   जय  हो    हे हरि  प्रिय  लक्ष्मी  आपकी
 जय    हो ,    हे    अमृत     की     बहन   आपकी    जय    हो     
हे  प्रभु    की    प्राण प्रिया    आपकी  जय   हो     हे देवताओं की
ईश्वर आपको नमस्कार है  नमस्कार है ,हे दुखों की नाश करने वाली
आपकी जय हो  नानाप्रकार के भय से मुक्त करवाने वाली  आपकी
 जय हो    हे प्रचण्ड पराक्रमी वाली     आपकी   जय   हो        
जय  समुद्रजा जय कमलनैनी  जय  विष्णुप्रिया  चंद्राननी   
[ ६  ]
संपूरनी जग कामना माँ       जय जीवनी संजीवनी 
नमो नमो माँ मंगलरूपा  जय मंगल जगत करावनी 
कुर्सीप्रदाता  भाग्यविधाता  जय नमोनमो दातारिणी 
                नमोनमो  माँ विश्वरूपिणी जय नमो नमो हितसाधनी।                   
 
 
भावार्थ    :    —–  

 

 

हे      समुद्र      की     पुत्री      आपकी     जय     हो ,हे    कमल
 जैसे   नेत्रों   वाली    आपकी जय हो   ।    हे     भगवान  विष्णु
की   प्रिय ,      चंद्रमा    जैसे   मुख वाली     आपकी  जय    हो    ।
हे लक्ष्मी माता आप संसार की समस्त कामनाओं की पूर्ति करने
मैं सक्षम हो ।    हे संसारी जिंदगी भी आप ही हो आपकी जय जय
हो ।    निराश मृतप्राय जीवन की संजी वनी  तुम ही हो आपकी
जय हो    ।   हे मंगल रूपिणी  मंगल मयी  माता आपको नमस्कार
है  नमस्कार है   आपकी जय हो।   हे कुर्सी प्रदान करने वाली अच्छा
पद दिलाने वाली ,भाग्य बदलने वाली देवी  । आपकी  जय हो    हे
देने वाली  आपको  नमस्कार  होवै  आपको  नमस्कार  होवै  ।
 
 
जय समुद्रजा जय कमलनैनी जय विष्णुप्रिया चंद्राननी   
 
 
     [   ]

 

 

 समृद्धि बोनी दारिद्र  धोनी  जय समृद्धि करनी संपनी 
  कंगला मैं माँ  मंगला तू       जय सुखदाती सुखसंजनी   
जग ब्याधियाँ निर्मूल निशचल जयपरमानंद प्रदायिनी 
नमो नमो धनद्रव्य स्वामिनीजय नमोनमो हरिकामिनी।
 
भावार्थ :——-    
 
हे समुद्र की पुत्री ,हे कमल जैसे नेत्रों वाली आपकी जय हो । हे
भगवान विष्णु की प्रिय ,चंद्रमा जैसे मुख वाली आपकी जय हो ।
    हे समृद्धि की शुरुआत करने वाली ,तथा दारिद्र   [  गरीबी ]
का नाश  करने वाली ,मनुष्य को संपन्न करने वाली ,      हे
सम्पन्नता     आपकी     जय  जय    हो ।    हे  माता मैं हर
तरह कंगाल [  असहाय हूँ   ] और  आप हर  तरह मंगल करने
वाली हो ।  तथा तुम सुख  प्रदान करने वाली     हो ।  और  तुम
सुख को हमेशा  बनाये रखने वाली हो ।  संसार रूपी सभी
ब्याधियों को तेजहीन कर खत्म कर देने वाली शांति प्रदान
करने वाली ।    हे परमानन्द प्रदान करने वाली  तुम्हारी  जय
जय हो ।   हे धन द्रव्य की स्वामिनी आपकी नमस्कार है
नमस्कार है   हे  परमेश्वर की भामिनि  आपको नमस्कार है
नमस्कार है   आपकी   जय जय  कार  है 
 
जय समुद्रजा जय  कमलनैनी जयविष्णुप्रिया चंद्राननी   
 
 
  [   ]
नाते जग सब निभाता रहूँ  जय कृपा हो   परिपूरनी  
  
परहित निजहित दान करुँमैंजय पुण्यप्रदायिनपुण्यनी 
नमो ,नमो माँ इच्छापूरण    जय  नमो नमो  चैतन्यनी  
मेरी, ओर निहारौ माता   जय त्राहि  त्राहि   कामायिनी  ।  
 
भावार्थ :——-

 

 
हे समुद्र की पुत्री ,हे कमल जैसे नेत्रों वाली आपकी जय हो ।
 हे भगवान विष्णुकी प्रिय ,चंद्रमा जैसे मुख वाली आपकी
जय हो ।   हे  माता मैं इस संसार के सारे नाते निभाता रहूँ
 । आपकी ऐसी कृपा हो जाये मैं आपकीजय बोलूं   मैं अपने
हित के साथ दूसरों का हित  दान करूँ  । हे पुण्य प्रदान करने
वाली ,पुण्यस्वरूप आपकी जय हो । हे इच्छाओं को  पूरण
करने वाली माता आपकी जय हो ।
हे जीवंतता से ओत प्रोत करने वाली आपको नमस्कार है
नमस्कार  है ।    हे मां  इस रामगोपाल राधे कृष्णा की
तरफ देखौ , इसे शरण दे दो    । मैं    दुखों     से    त्राहि
त्राहि कर   रहा  हूँ।  हे कामायिनी मेरी पूर्ति कर   दो  ।
 
जय समुद्रजा  जय कमलनैनी , जय विष्णुप्रिया चंद्राननी   
  [    ]
भूतल श्रेष्ठ बना पुजवादे  जय समर्थदात्री समर्थनी  
दयाविनय आभूषणदाती जयशीलप्रदायिन शीलनी   
पांडित्य को तेरा सहारा  जय पूज्य माँ   पुजवाबनी    
नमो नमो  हे  विद्धान माता ,  जय ज्ञान रूपा  ज्ञाननी  
 
भावार्थ :——- 

 

 

  हे समुद्र की पुत्री ,हे कमल जैसे नेत्रों वाली आपकी जय हो  
 हे भगवान विष्णु   की प्रिय ,चंद्रमा जैसे मुख वाली  आपकी
जय हो    हे माता मुझे पृथ्वी पर सबसे श्रेष्ठ बनबाकर पुजवा
दे   हे सामर्थ वान बनाने वाली समर्थरूपिणी आपकी जय हो  
  हे दया ,विनय ,आभूषण प्रदान करने वाली आपकी जय हो  
  हे शील प्रदान करने वाली ,शील स्वरूप आपकी जय हो  
 विद्वानों ,पंडितों  को तेरा  ही  सहारा है  हे पूज्य मां  तू  ही
पुजवाबनी है । तू ही पुजवाने वाली है ।      हे विद्वान माता
आपकी जय हो  आपको नमस्कार है।   नमस्कार है ।  हे ज्ञान
स्वरूप ज्ञान प्रदान करने वाली।  आपको जय हो    ।
जय  ,समुद्रजा  जय  कमलनैनी  जय   विष्णुप्रिया, चंद्राननी 
 
   [   ]
दिशाबोध भ्रमित  प्राणीन माँ जय राहें सुगम वनावनी      
सागर सुता नमन शत कोटी जय उन्नतिंद्धार खुलावनी 
 जीवन भर धनसम्पदवर्षा जय ”गुपालसेवक ‘स्वामिनी
 आरत  दीनजनन सुधि लीजे जय जय संसार चलावनी       
 
 
भावार्थ :——- 
  हे समुद्र की पुत्री ,हे कमल जैसे नेत्रों वाली
आपकी जय हो       हे भगवान विष्णु की प्रिय ,चंद्रमा जैसे
मुख वाली आपकी जय हो   संसार मैं सही राह दिखाने वाली
आपकी जय हो     रास्तों को आसान बनाने वाली आपकी
जय हो    हे समुद्र की पुत्री आपको करोड़ों नमस्कार   हैं    
 मनुष्य की उन्नति के द्वार खोलने वाली आपकी जय हो    
  हे मात जो दुखी आपकी शरण मैं आये ,उनकी अवश्य सुनें
।      हे स्वामिनी ये आपका सेवक गोपाल आपसे प्रार्थना
करता है ।
जय समुद्रजा जय कमलनैनी जय विष्णुप्रिया,चंद्राननी   
 
 
    [    ]
 धनेश्वरी सौभाग्य श्री    महालक्ष्मी महा आस    
विष्णुप्रिया  विष्णुभामिनी , कीजै मो घर वास   
कीजै मो घर वास            ,  दउँ  करजोर बुलाबौ ।
करूँ वंदना संग भामिनी , औसर मोहै ग़हावौ   ।
परसादी स्वीकार हमारी , रूची सों दोनों पावौ   ।
गंगा जल हरि संग पीजै , वासौ घर ना जावौ     ।
धनधान्य और मुंगामोती ,  कंचन रतन बढ़ावौ ।
दरिद्र दंसन ,  तनन रंजन ,समृद्धि फैलावौ     ।   
हरौ मेरे कष्ट स्वामिनी   ,सागर सुता विष्णु भामिनी
,
 
 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *