श्रीकृष्ण मथुरा जन्म गोकुलगमन

कारागार प्राकट्य गोकुल गमन
धरा अवतरण  धरा बचावन      कारागार  खुलइया   स्याम    ।
बेरी खुलीं दौन अपढारी           वासुदेव   विस्मय    संग बाम  ।
रूप चतुरभुज  दीने  दरशन   तात  मात मन       पूरन काम   ।
भगतन बन्ध निबारन हारे   मुकती मुक्त करैया       स्याम  ।
गोकुल जावों नन्द भवन मैं     जनक  इसारो  दीनों  स्याम   ।
बरसै नीर भदरवा बदरा          चमके  चपला   मेरे   स्याम  ।
घबरामें  मन वासुदेव प्रभू     कैसें    जावों   गोकुल  गाँव    ।
जमुना जोर चढ़ी पग परसन    चरन बढ़ायौ  बनिहौं  काम ।
पान्झ भई जमुना महारानी     सहज पार कर गोकुल धाम।
अचरज मन मै जोस हिये मैं    निरखत गोकुल तमाम ।
त्रिलोकी पति कृष्ण कन्हैया    ‘’ गुपाल’’ सुंदर मोहन स्याम ।
जय राधे जय राधे राधे         जय  राधे  जय       जय घनस्याम    ।
जय कृष्णा जय कृष्णा कृष्णा जय ‘’ गुपाल’’प्रभु राधेस्याम  ।
अर्थ     :—
मुरली धारण    करने वाले प्रेम लुटाने वाले हे प्रिय  मनमोहन
घनश्याम आपने जन्म लिया कारागार के लगे ताले अपने आप
खुल  गये । आप जैसा जेल खुलवाने वाला  दूसरा नहीं  हुआ ।
श्री वासुदेव और देवकी क़ी  हथकड़ी बिना खोले खुल  गयीं ।
वासुदेव जी  अपनी धर्मपत्नी देवकी के  साथ आशचर्य चकित
हो गये । भक्तों के सभी बंधनों के काटने वाले मुक्ति प्रदान
करने  वाले के लिए हथकड़ी खुलना बड़ी बात न था। आपने
अपने पिता को  आपको गोकुल ले जाने  को कहा ।पानी बरस
रहा है भादों का महीना है   बिजली कड़क रही है वासुदेव जी मन
मैं घबरा रहे हैं मैं गोकुल कैसे   जावों । हरी को छूने को यमुना जी
चढती जा रही है । भगवान ने अपना चरण बढ़ाया ।  छूकर जमुना
जी उतर  कर तले मैं बैठ गयी। वासुदेव जु सहज ही पार क़र
अपनी ठौर  गोकुल   पहुंच गये हैं ।  उनके मन   मैं आश्चर्य है
। तथा वे जोश से  भरे हुए हैं । गोकुल अति सुंदर गांव है।
वे गोकुल की गलियों को देखरहे हैं। वे  बड़ी सुंदर हैं।गोपाल
कहते है  वसुदेव जी सोच रहे हैं कि यह बालक तीनो लोकों
का स्वामी है । यह सुख प्रदान करने वाला  तथा मन को
मोहित करने वाला  अत्यन्त सुन्दर  है  ।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *