श्री गोपाल ब्रज मंडल कीर्तन रस माधुरी

श्री गोपाल ब्रज मंडल कीर्तन रस माधुरी
ब्रजनन्दन  ब्रजभूषन  ब्रजबर         ब्रजसेवक   ब्रजस्वामी  स्याम ।
ब्रजपालक  ब्रज तारक  बालक       ब्रजबसुधा      रखवारे    स्याम ।
ब्रजबनबन  बिहिरित  बनबारी    ब्रजललिना  ब्रजस्वामिन स्याम ।
डार डार अरु पात    पात     ब्रज         बिरखन   बातें     राधे स्याम ।
सुरभि चलत लै जुगल नाम प्रभु                 राधे राधे कृष्ण  प्रणाम ।
बारि  बहत धुनि कलकल कारी                कारी जमुना   कारे स्याम ।
कुण्डी   कुंडा   तीरथ    ब्रज बन           दीप दान  अदुभुत छबि शाम ।
ब्रजबासी सब     बिरन बिहारी                 ज्यों बलदाऊ और श्रीदाम ।
कीर्तिनंदिनी स्वामिन ब्रज बन               सेवक गोपी  सेवक स्याम ।
नाना यौनि जीव तपधारी                       भजत स्याम  सलौनी नाम ।
भूमंडल  ब्रजमंडल   पाबन                ” गुपाल ” ब्रज गोबिंद  प्रनाम ।
जय राधे   जयराधे    राधे                        जय राधे  जय   जय घनस्याम  
जय कृष्णा जय कृष्णा  कृष्णा           जय ‘गुपाल’ प्रभु  राधे स्याम
भावार्थ :—–
हे मधुसूदन श्रीकृष्ण आप बृज के बेटे हो  आप बृज मैं
श्रेष्ठ हो आप बृज की सेवा करने सेवक हो आप बृज के स्वामी हो ।
आप ही बृज के पालने वाले हो हैं और बृज के तारने वाले हो।आप
ब्रजमंडल के रखवाले हो । बृज के प्रत्येक वनों मैं बनवारीश्रीकृष्ण
ने बृज गोपियों और बृज स्वामिनी के साथ विहार किया। वहाँ के
वृक्षों की डाली डाली और पत्ते पत्ते पर श्रीकृष्ण व राधिके की बातें
होती हैं ।यहाँ हवा भी युगल प्रभु का नाम लेके चलती है राधे राधे
और कृष्ण जी को प्रणाम करती है । यहाँ पानी कल कल बहती है ।
जमुना का पानी भी काला है ।और श्याम सुन्दर का भी रंग भी काला
है ।नाना प्रकार के जीव यहाँ तपस्या करती है। वे दोनों श्याम व्
सलौनी का नाम लेते हैं । भूमण्डल मैं ब्रजमंडल बहुत ही पवित्र
जगह है  गोपाल बृज गोविन्द दोनों को प्रणाम करता हूँ ।

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