नवबर्ष की शुभ कामना 

                   [ १ ]

 

नवबर्ष की शुभ कामना
स्वप्निल हो ये साल तुम्हारा मंजिल देने वाला । 
खुशियॉं पाओ खुशिंयॉं बॉटौ धन से भरने वाला । 
अर्थ काम को देने वाला हो तुमको ये नव वर्ष ।
बाधा बिघ्न फूल बन जावें बॉंटै तुमको हर्ष । 
कीर्ति पताका बढे तुम्हारी खोलै उन्नति के सोपान । 
रूपया पैसा चॉंदी सौना सुयाचक को देना दान । 
कमी आवरन टूटै निश्चति समृद्धि का घर हो । 
रूपये पैसै की बहुतायत चारों ओर अमर हो । 
समृद्धि के गीत चहूँ दिश  मीत सुनाई देवै । 
मॉगौ चॉदी पाओ सोना अदभुत मंजिल देवैं । 
ज्ञान गंग उन्मत होओ संगत साधु संतौं की । 
चंगा तन मन पाओ सबहि दया रहै प्रभु भक्तो की । 
अहम आवरण छूट जाय सब निरमल मन तुम पाओ ।
सुमरन करि नाम सुधारस पीवौ परमारथ कर जाओ ।
दीन दुखी लोगों की सेवा कर कर मन हरषाओ । 
बुद्धि विवेक सहजता बॉंटौ मूरत गुपाल हिये बसाओ

 

[ २ ]

 

 

नव वर्ष में नवचेतना उत्कर्ष हो।
बुद्धि बल धनवृद्धि सहज हो सहर्ष हो।
सर्वत्र मित्रो शांति शांति ,सर्वत्र मित्र हर्ष हो।
विप्लव हों न मही ऐसा नव वर्ष हो।
अपराधी भयभीत हों           सुजन नहीं त्राण हो।
अवनति ना  हो स्रष्टि की  उन्नति  गतिमान हो।
आयुधों की न दौड़ हो  विश्व नीति प्राण हो   ।
वैमनस्य निष्प्राण हो , विश्व का कल्याण हो ।
आतंक मरें आतंक        का  जगअंत  हो     ।
मानवता मूल्य बढ़ें     सुशाशन मन्त्र  हो    ।
ना हो अन्याय   कहीं   न्याय सारे तंत  हो  ।
प्रेम सुधा बाढे जगत   मनुज  सभी संत हो  ।
नव औषधि खोज होंवें  मनुमात्र निरोग हो।
त्याग तप संसार बढे    दूर भोग रोग  हो  ।
परोपकार जगत हो    विश्व भर संयोग  हो।
अध्यात्म मनुज लक्ष्य हो , न भोग उपभोग हो।

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