——————   साधू —————–

  ——————   साधू —————–
 
निज कल्याण और लोक हित त्यागे जिन घरवार /
भिक्षा से जो करत हैं निज  उदर पूर्ति    व्यवहार  /
त्याग तपस्या संतोष जिन  जीवन   के   आधार  /
आवश्यकता तज दीन सब       प्राण हेतु आहार  /
परोपकार मैं रत रहें , मन जीवन कौ कल्याण   /
दुश्मन ते हु द्वेष नहीं         समझ धरा भगवान  /
 
सब धरमन ते बडौ    जिन मानवता ते प्यार /
सीमातीत भये जेहि   लखें एक  दृष्टी  संसार /
करुना दया प्रेम सेवा जिन  त्यागो  अहंकार  /
समता जीवन मैं भई एक रूप निरखत संसार /
हाथ जोड़ विनती मेरी जनता देश  महान    /
साधू मैं न विक्रती      जग के ये  वरदान   /
देखौ जग मैं जो मिलें दिए गुनन की खान /
उनको संग चल्वो भलौ वे ही जग के प्राण /
भेष धरे जे संत के एकहू गुण जिन नान्य /
इन ते तौ ग्रहस्थी भले जो संसार चलाय /
सोच समझ कर आप सब इन सों कर व्यवहार /
लोक परलोक बिगारें स्वादू बचके  रहो संसार /

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