स्वतंत्रता पर्व पंद्रह अगस्त

पंद्रह अगस्त २०१५ 
रामगोपाल सिनसिनवार 
 
आओ  ,हिल , मिल , सब              हर्ष , मनाएँ  /
पावन पर्व ,स्वतंत्रता को, समझें ,और समझाएँ /
स्वतंत्रता ,अर्थ नहीं    ,             हम ,    अधिकारों ,का दमन करें /
स्वतंत्रता ,अर्थ नहीं    ,              आतंक वाद   को   नमन      करें /
स्वतंत्रता का
अर्थ यही है ,            आँख , खोलकर ,करम करें     /
स्वतंत्रता का अर्थ यही है , भोग ,     नहीं हम   ,        त्याग करें   /
 
हिंसा और अहिंसा का ,    अंतर ,मन ,मैं उपजाएँ / 
अबदुल कलाम ,जीवन ,  मरना पीढ़ी को बतलाएँ /
——————————आओ  ,हिल , मिल , सब              हर्ष , मनाएँ  /
पावन पर्व ,स्वतंत्रता को, समझें ,और समझाएँ /
शहीद हुए , देश की खातिर    ,        उन ,वीरों को , याद  , करें  /
उनकी ,उनके   परिवारों  की  ,       चरण वंदना, आज   , करें   /
कोटिश ,नमन ,आज शुभ अवसर , ईश्वर से ,फरियाद ,करें     /
मिट गये वतन के खातिर वे         , कृतज्ञता  साकार  ,करें     /
इनकी जीवन कथा अमर कर  ,पाठ अमरता , पढ़वाएँ /
इनके ,कारण ,मिला ,तिरंगा   ,नव पीढ़ी को बतलाएँ  /
—————————-आओ  ,हिल , मिल , सब              हर्ष , मनाएँ  /
पावन पर्व ,स्वतंत्रता को, समझें ,और समझाएँ /
कर्तव्य करें मर्यादा रहकर  ,जन जन ,सेवा ,आँकाक्षा हो /
अपने ,अपने परिवारों से, आगे की  ,मन मीमांक्षा       हो /
कल्याण हेतु जीवन व्रत लेवें , संकल्पों को साकार   करें  /
खुशहाली ,भारत की सोचें      ,मूल मंत्र अखित्यार  करें  /
प्रेम ,करें ,जन जन से ,हम सब ,प्रेम का पाठ पढ़ाएँ /
सदां सादगी , सत्य त्याग को  , जीवन मैं अपनाएँ /
———————————–आओ  ,हिल , मिल , सब              हर्ष , मनाएँ  /
पावन पर्व ,स्वतंत्रता को, समझें ,और समझाएँ /
 
 
दौड़ ,भाग , पश्चिम की, छोडो ,   अपनों ,को ,देखो , भाई  /
हीरा ,मोती , सोना ,चाँदी        ,  इनने ,  करी    , लुटाई   /
सोने की चिड़िया ,पश्चिम को  , नहीं ,फूटी ,आँख ,सुहाई  /
अपनी संस्कृति ,अपनी रश्में ,बन ,अपनों के, हमराही    /
हम आगे थे ,आगे,होंगे     ,   आगे    हम बढ़ते जाएँ /
हम तो दाता ,ये भिक्षुक हैं ,विश्व गुरु ,फिर बन जाएँ  /
 
————————————–आओ  ,हिल , मिल , सब              हर्ष , मनाएँ  /
पावन पर्व ,स्वतंत्रता को, समझें ,और समझाएँ /
कठमुल्लेपन के, आगे नतमस्तक ,         क्यों ,होते ,हो /
इनके ,नापाकी रस्तों पर ,         आँख ,मूँद ,चल देते हो  /
क्या अच्छा ,क्या हितकारी है   ,बिन ,सोचे ,बढ़ लेते हो /
शांति और ,प्रेम का पथ            ,तुम अक्सर ,खो देते हो /
आतंकवाद की मित्रो सब ,    कब्र खोदते जाएँ /
नव विकास के मीत बनें , खुश हाली अपनाएँ /
———————————आओ  ,हिल , मिल , सब              हर्ष , मनाएँ  /
पावन पर्व ,स्वतंत्रता को, समझें ,और समझाएँ /
धर्म अधर्म ,का ,     पहले से         ,       मंथन    ,       कर  , लेना /
आँख मूँद कर ,किसी, गुरु पर      ,    श्रदा ,तुम ,मत ,कर, लेना /
गाढ़ी ,कमाई, जीवन ,की ,का      , हिस्सा  ,इनको ,  मत  ,देना  /
पाखंडों की ,बाढ़ ,भयंकर             ”,स्वतंत्र” समझ  मत चल देना /
 
पाखंडी ,पाखंड को भैया   देश से दूर भगाएं /
ज्ञान ,विवेक त्याग की ,जीवनज्योति जलाएँ / 
————————————-आओ  ,हिल , मिल , सब              हर्ष , मनाएँ  /
पावन पर्व ,स्वतंत्रता को, समझें ,और समझाएँ /
रामगोपाल सिनसिनवार 
     १५ अगस्त २०१५ 

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