—————–स्वादू —————————-

—————–स्वादू —————————-
 
संन्यासी कै राज ऋषि कै मुकुट बंद भूपाल /
ऊँचे सिंहासन विराजत ईर्ष्या होंत  गुपाल   /
भोग करें तज त्याग कूँ आश्रम फाइव स्टार /
कष्ट न तनकहु सह सकें बातन कौ व्यापार  /
सही न जाये जिन धुप और जाड़े की बयार /
एसी मैं राजत रहे एसी ही  जिनकी कार  /
एसी जिनकी कार बगल चेली सोलह साल /
राजान ते उपर भये कलियुगी स्वादू  गुपाल  /
नारिन ते स्नेह अति       छाती ते चिपटाय /
आजकल के स्वादू निरख आंख बंद है जांय /
सुख सुविधा तो चल रहीं लूटी जनता देश /
ठेके सुख देवे के लीने बैठे ये साधू के भेष /
जनता अपनी धर्म हित पूजे इनके पाम  /
अगेरबत्ती करत हैं    , कर्म करें बदनाम /
कानुनहु की विवशता मन मर्जी कौ हाल /
लूटें तन मन स्वादू भोरी जन  बेहाल    /
पढ़े लिखे भद्र जनन को बुद्धू देंत बनाय /
अनपढ़ स्वादु पंडित मुल्ला देश कूँ बहका्य
आम नागरिक ते अलग बनें कानून /
दोषी कूँ कडवी सजा होय चहे अफलातून /
अपराधिन ते बड़े ये लेंत धर्म की आड /
साधू जग ढूंढे मिलें स्वादू न की है बाढ/

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