नवबर्ष की शुभ कामना 

नवबर्ष की शुभ कामना  स्वप्निल हो ये साल तुम्हारा मंजिल देने वाला । खुशियॉं पाओ खुशिंयॉं बॉटौ धन से भरने वाला । अर्थ काम को देने वाला हो तुमको ये नव वर्ष । बाधा बिघ्न फूल बन जावें बॉंटै तुमको हर्ष । कीर्ति पताका बढे तुम्हारी खोलै उन्नति के सोपान । रूपया पैसा चॉंदी …

स्वतंत्रता पर्व पंद्रह अगस्त

पंद्रह अगस्त २०१५  रामगोपाल सिनसिनवार    आओ  ,हिल , मिल , सब              हर्ष , मनाएँ  / पावन पर्व ,स्वतंत्रता को, समझें ,और समझाएँ / स्वतंत्रता ,अर्थ नहीं    ,             हम ,    अधिकारों ,का दमन करें / स्वतंत्रता …

विश्व को दीपोत्सव शुभकामना

 दीपोत्सव का पर्व आपको       , जग     मग   करने वाला हो । धन की हो वर्षात सालभर         ,समृद्धि        देने     वाला हो । दीपौं का त्यौहार खुशी के        , छौडै     मन   …

हिन्दी हिन्दुस्तान

हिन्दी हिन्दुस्तान पखवाडौ ,हिंदी, मनैं ,” गुपाल ” गाथा, , गॉय । दै ,विसार, फिर ,साल ,भर ,बैठै ,मौज ,मनॉंय । बैठै, मौज, मनॉंय , देख ,कें ,अग्रेजी, मूवी । बहस ,होय ,अंग्रेजी, में, सब, नेतान, की, खूबी । अग्रेजी, में, जगें ,सोय ,रहै, अंग्रेजी, में । अंग्रेजी ,में, नमन …

वंदनीय भारत भूमि

       वंदनीय     भारत भूमि  शश्यश्यामला भारत भूमी                 ,  अनुपम  छटा मनोहर । उन्नत शैल  शिखर मनमोहक          , कल कल झरते निर्झर   । आँख मिचौली करतीं सलिला          ,   पुलकित करती जीवन  । संपूरण    धन …

घर का अवतार

                घर   का   अवतार                               —————————- मोहन की माँ देखो मैं अपने लिए खददर की मंहगी कमीज तथा ब्रासलेट की धोती लाया हूँ /  सुनकर बुद्धो दांतो मैं पल्लू दबा हंसने …

रोजगार

धर्मशाला की खिड़की खुली थी ।   भोर की पावन बेला की सुरभित पवन , तन व मन को आलस त्याग कर उठने का आमंत्रण दे रही थी ।   पलकों के , आवरण तहत दबे नयन खुलने की असफल कोशिश कर रहे थे।    सुनाई दे रहा था महाशिव ,महाशक्ति के पुत्र गजानन गणेश …

मैं बाट देख रही तेरी

मेरे घर , आना रे , घनश्याम ,  प्रभु मैं , बाट, देख  रही ,तेरी ।    मैं तो बाट देख रही तेरी             ,      मैं याद कर रही तेरी  ।    गऊअन ,तू , खिरकन कर, अइयौ  ।     ,   मैया जसुदा से,    कह …

पतिदेव

पतिदेव :———जालोर का मुख्य डाकघर शहर के बीचों बीच स्थित था । मोहन की यहाँ नई नौकरी लगी थी ।उसकी उम्र अभी बीस साल की  ही थी  ।युवा मन यहाँ की नैसर्गिक सुंदरता में रीझा रहता था ।दिन भर डाकघर के  कार्य को करने के बाद वह भृमण हेतु कुछ …