रक्षाबंधन

रक्षा बंधन  पर्व मनाएं ।
रक्षाबंधन उत्सव अदभुत संबंधों के स्पंदन का ।
कच्चे धागे का बांकापन भाई के संकल्पन का।
परम सनातन  प्रथा पुरातन प्रेम पूर्वक जकड़न का ।
सहज समर्पण निश्चय पक्का बहना के अभिनंदन का ।
प्रेम बंध हम बंध जाएँ ।
रक्षा बंधन पर्व मनाएं      ।
नेह पूर्ण मुखमंडल आभा बहिनें थाल सजाती जब ।
कुंकम  रोली अक्षत चंदन मस्तक तिलक लगाती तब ।
आयु यश वैभव वृद्धि  विनती प्रभु सुनाती तब ।
भाई  की   आरती करके मीठा मुंह करवाती तब ।
आओ बहिना तुम्हें बुलाएं।
रक्षाबंधन पर्व मनाएँ  ।
राखी सूत्र उदघोष स्वतही बंधु खड़ा है साथ तेरे ।
पौंछेगा सब अश्रु भगिन के टारे संकट  विरन तेरे ।
सजी कलाई बहिन बधाई तू है उर का प्यार मेरे ।
सत्य वचन भाई का जानों तू न एक में  साथ तेरे ।
आजा मो द मनाएं ।
 गुपाल रक्षा पर्व मनाएं    ।
नन्हें  नन्हें   नाज़ुक  कर से मांगी अपनी जिम्मेदारी ।
प्रेमाश्रु दिरग पुलकन काया  नेहा कांक्षी राज दुलारी ।
जनक जननि संग सहोदर बहना  पीठ  हो गईं भारी ।
मात पिता के बाद सुरक्षा  कच्चे धागे  करनी प्यारी  ।
आओ विश्वास जगाएं ।
गुपाल  रक्षा पर्व मनाएं ।
प्रतिस्पर्धा झंझावातों से संबंधों को मीत बचाएँ ।
आपाधापी खुदगर्जी छोड़ें पूर्व पुरातन प्रीत जगाएं ।
तुनकमिजाजी भूलें सारी रक्षाबंधन हर्ष मनाएं ।
बहिना बांधे राखी कर में भाई का कर शीश पै पाएँ ।
आओ हम संस्कार जगाएं ।
रक्षा  पर्व गुपाल मनाएँ ।
कवि रामगोपाल सिनसिनवार

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