परिचावली महान भक्त कविराज तुलसीदास

बाँदा जनपद मैं बसत राजा पुर  शुभ गांव ।
हुलसी नारि सुहावनी द्विजवर आत्माराम  ।
श्रावण शुकली सप्तमी घुटी घटा चहुंओर ।
गरजें बादल चमकें चपला दादुर पपिहा शोर ।
कविराज के  जन्म को औसर आयौ जान  ।
रामचंद्र चरनन कृपा आये श्री हनुमान    ।
रुदन शिशु कीनों नहिं बोले मुख श्री राम ।
नारि वृन्द अचरज अति सुंदर शिशु ललाम ।
माया भ्रमित भये पित माता चुनियाँ जागे भाग।
दीनों पुत्र ग हा य निज लागी हिये आग ।
चुनियाँ दुनियाँ से गई कीनों भारौ लाड़  ।
पार्वती जननी जगत प्यार की आई बाढ़ ।
प्रेरणा शंकर हुई संत अच्युतानंद ।
नरहरिदास आश्रम पले  संतन मन आनंद ।
प्रखर बुद्धि विद्या गहन द्विजयानी के फेर ।
आश्रम तज गृहस्थी भये माया भाई केर ।
तानों सुन निज प्रिया को त्याग दीन घर बार।
रामबोला तुलसी भये तज भंगुर संसार  ।
शब्द शब्द गागर भरी मानस कीन साकार ।
कविकुल गौरव श्रीराम प्रिय बजरंगी आभार ।
तुलसी तुलसी रूप जग हिंदी लेखन मंत्र।
पाठन पठन स्मरण उत्तम जीवन   तंत्र ।
नमन श्रद्धेय तुलसीदास
रामगोपाल राधेकृष्णा
www.gopalkrishna.in
Ramgopal.sinsinwar@yahoo.com

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