सुहानी जिंदगी

[ १ ]
अजीब सी कहानी सुहानी जिंदगी।
 सार केवल करलो गोपाल बंदगी।
नित नये खेल हमें खिलाती जिंदगी।
बिगाड़ती सभी कुछ बिगड़ैल जिंदगी।
सुधारती सभी फिर अनौखी जिंदगी।
अपनों की भी याद भुलाती जिंदगी  ।
प्यारे प्यारे लोग मिलाती जिंदगी।
बाधाओं की नींद उड़ाती जिंदगी।
सतरंगी फुहारे  छुड़ाती  जिंदगी।
मीठी मुरलियासी सुरीली जिंदगी।
चंग भपंग ढोलक बजाती जिंदगी।
अजीब सी कहानी गुपाल जिंदगी।
                            [ २ ]

 

संगीत है ये जिंदगी      इसे गुनगुनाओ तुम।
 बुद्धि  बल विवेक युत खुद को बनाओ तुम।
कीर्ति  की चादरिया  लिपटो नाम पाओ तुम।
 साधना पथ पर चलो न हिचकिचाओ  तुम।
लक्ष्य को ही याद  रखो सब भूल जाओ तुम।
कुछ कर दिखाओ ये जिंदगी यूँ न गँवाओ तुम।
कर्म पथ अविचल चलो  यूँ न गँवाओ  तुम।
करम पथ चलते रहो यूँ न डगमगाओ तुम।
दुःख सुख फल है जिंदगी भक्ष्य जाओ तुम।
परहित करो छोड़ परपीड़ा गोपाल ध्याओ तुम।
मंजिलें कदमों होंगी आजमाओ  तुम।
सार्थक करो मनुष्य जन्म
नहीं डगमगाओ तुम।

 

 

 

 

 

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