Jigyasu man जिज्ञासु मन

पूछूँ किसको में नमन करूँ ।
बोलो उसको में नमन करूँ ।
धर्मपाथ जिनके जीवन पथ  पग पग गोचर होता है ।
त्याग तपस्या साधक नर जो होश कभी न खोता है।
पूछूँ किसको में नमन
कह दो उनको मैं नमन करूँ ।
मानवता हितार्थ मनुज  जो इतिहास बना जाते है ।
न्यौछावर कर प्राण स्वयम जग बलिदानी हो जाते हैं ।
निजहित हीन सदा रहते हैं  साधे परहित  जाते है ।
लेते ना जो किंचित  जग से  सर्वस्व  लुटा जाते है ।
पूछूँ किसको मैं नमन करूँ ।
दो आयुष तो नमन करूँ ।
जीवन लक्ष्य धर्म शांति और जग  विकास बन जाते हैं ।
एक कोने से उठकर जो नर  विश्व पटल छा जाते।  हैं  ।
आयुष दे दो नमन करूँ ।
महा अहिंसक जीवनचर्या जो जग सहिष्णु  बन जाते हैं ।
भेदभाव हीन मनीषी  नर
सत्य भाव गह जाते है ।
आयुष दे दो नमन करूँ ।
संकीर्णता मिट जाती वो प्रभू रूप हो जाते हैं ।
वैर घृणा भेद हिंसा जो सभी गौण कर जाते है ।
पूछूँ किसको मैं नमन करूँ ।
आज्ञा दे दो नमन करूँ ।
बाँट बाँट कर जन जन जो कुर्सी पर होते आसीन ।
तर्क नहीं कुतर्क बढ़ाते दंगे करवा रहे शांति छीन ।
राष्ट्रधर्म जो नहीं मानते अपने अपने धर्म   प्रवीन ।
न मर्यादा न लोकलाज है चरित्र हीन सभी संगीन ।
क्या इनको मैं नमन करूँ ।

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