धन तेरस शुभकामना

धनवान नहीं  धन कामी हूँ कामना धन मन रखता हूँ ।
धन तेरस हर बार मनाता हूँ मांग सपर्पित  करता हूँ ।
कर्ज बहुत है मर्ज बहुत  धन देवी सुमरण करता हूँ ।
मेरा मेरे देश देश जन में   सबकी   अर्जी रखता हुँ ।
मालदार हों सकल नागरिक माला चरणों रखता हूँ ।
माल इकट्ठा कर भाग न जाये आशा मां से रखता हूँ।
अभी चुनाव सिर आये है नेताओं से में डरता हूँ ।
पेट काट कुछ पैसा जोड़ा चंदा  नाम सिहरता हूँ।
घोटाला न हो भारत भूमि महा प्रार्थना में  करता हूँ ।
सुरसा मुख सा मंहगाई मुख हो न  विनती करता हूँ ।
निर्बल असहाय प्रजाजन हूँ पूजन तेरा में करता हूँ ।
सुनवाही गरीब कहाँ होती मस्तक चरनों  धरता हूँ
कहाँ स्वाद अब त्योहारों में पूजा बेमन से होती है ।
बिना स्वेद तन  झलक  धनबर्षा  न धनतेरस होती है ।
पूजा से धन मिलता उनको जो दलाल हैं सत्ता के ।
कोष लूट अमीर बने जो          नातेदार हैं राजा के ।
जिनकी कलमों से करोड़ अरब  के  बिल उठ जाते ।
जिन के आँख मूंद लेने से वारे न्यारे भी हो जाते ।
जो देते हैं गुप्त दान जिनसे सत्ता पलती भारत  ।
राजाओं के राजा ये पाल रहे सब अपने स्वारथ     ।
चारों ओर है त्राहि त्राह चारों ओर मचा महा भारत।
लूट मची चिड़िया सोने की त्यौहारों में उलझा भारत ।
नजर रखो  सत्ताधीशों  पर  इनकी सत्ता को दो लानत  ।
धनतेरस फिर रोज होयगी विश्वगुरु हो मेरा भारत ।

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