कृष्णा जय श्री कृष्णा हार नहीं जीत

जब जग सोता वे जगते हैं।
सपने अपने वे गढ़ते हैं।
मंजिल उनको ही मिलती है।
जो मंजिल को चुनते हैं।
प्रबल आकांक्षा प्रबल कर्म के
राही बनकर।
हटा मार्ग से अवरोधों को वे
चुनचुन कर ।
कील गाढ़ते उन्नति की निज लक्ष्य गवाही।
मंजिल को पाकर रहते हैं मंजिल के राही।

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