प्रेरक प्रेणन

सोने वाले जाग जरा तेरी रेल निकलने वाली है।
हर स्टेशन बिन पैसेंजर चली जा रही खाली है।
त्यागी जिसने सुख नींद नहीं।
उसको सीट मिलेगी नहीं।
जो अवसर को भुना न सका उसकी कीर्ति बढ़ेगी नहीं।
उद्यम हीन नरन की जग मैं होती बदहाली है .।
प्रति छन प्रतिपल जिन्हें याद रहती निज मंजिल।
मेहनत करने के संकल्पी जिनका लक्ष्य अटल ।
जिनने छन छन कीमत जानी सदा राम करें रखवाली हैं।
ध्येह एक हो लग्न समर्पण।
औसर भेंटेंगे मिल बाँट।
सबका सहारा प्यारा कृष्णा
निष्कंटक रखेगा राह।
कर्म करो फल के दाता हरि
मंत्र यही खुशहाली का।
काज आज का कल पर छोड़ा
 जिसने मेहनत से मुंह मोड़ा।
उनका रुकता उन्नति घोडा।
अंतत उनके हिस्से मैं आ नीं निश्चित कंगाली है।

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