विश्वमुखी संस्कृति संक्रांति पर्व

संक्रांति शुभ  महापर्व         जन जन जग  कल्यानक हो ।
सुसंकल्पों का   दाता  ,      संस्कृति   दिन  निर्णायक हो ।
अमर प्रीत महा  दानी        मरयादा      सम्मानी       हो ।
सेवा जप तप  त्यागी           मानव    अमर कहानी   हो 
 भारत चौदिस  समृद्धि           रीति नीति पथ गामी  हो   ।
धर्म कर्म जग में  बढ़ जाएं           भजन प्रार्थना वानी हो ।
 सत्य आचरण  धन  मनुज           धर्म धुरी सत्कामी हो ।
संस्कृति     उन्नत  धरनी         नील गगन उद्गामी  हो  ।
आओ प्रण लें  आज सभी       निज जीवन संस्कारी  हो  ।
तिमिर नाश हो जग समग्र   ज्योति धर्म आलोकित  हो  ।
महा संक्रांति महा पर्व तब   विश्व संक्रांति घोषित हो    ।

3 Comments

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