नौकरानी मालकिन

 मनोरमा दर्द की पीड़ा    से कराह रही थी स्तन के जानलेवा कैंसर ने उसके तन को हड्डियों का ढाँचा बना दिया था , बार बार असाध्य सी  बीमारी के उपचार ने उसके स्वास्थ को निरंतर गिरा दिया था    ।    वह जीवन से निराश होकर ईश्वर से   ही किसी   चमत्कार …

घर का अवतार

                घर   का   अवतार                               —————————- मोहन की माँ देखो मैं अपने लिए खददर की मंहगी कमीज तथा ब्रासलेट की धोती लाया हूँ /  सुनकर बुद्धो दांतो मैं पल्लू दबा हंसने …

रोजगार

धर्मशाला की खिड़की खुली थी ।   भोर की पावन बेला की सुरभित पवन , तन व मन को आलस त्याग कर उठने का आमंत्रण दे रही थी ।   पलकों के , आवरण तहत दबे नयन खुलने की असफल कोशिश कर रहे थे।    सुनाई दे रहा था महाशिव ,महाशक्ति के पुत्र गजानन गणेश …

पतिदेव

पतिदेव :———जालोर का मुख्य डाकघर शहर के बीचों बीच स्थित था । मोहन की यहाँ नई नौकरी लगी थी ।उसकी उम्र अभी बीस साल की  ही थी  ।युवा मन यहाँ की नैसर्गिक सुंदरता में रीझा रहता था ।दिन भर डाकघर के  कार्य को करने के बाद वह भृमण हेतु कुछ …