श्री गोपाल बृज बाल लीला कीर्तन रस माधुरी

  श्री गोपाल बृज लीला कीर्तन रस माधुरी   लीला    करत  दुष्ट  संहारे कंस अनुचरी  अनुचर स्याम । खेल खेल  प्रभु  खेल  खिलैया   पूतन दूध  पिवैया  स्याम । पीयो जहर जनिन गति दीनी  तो सो कौन  कृपालु स्याम । दूध दान दधि लूटन हारे       माखन बांटत हाथन  …

श्रीगोपाल शिव बजरंग कीर्तन रस माधुरी

श्रीगोपाल शिव बजरंग कीर्तन रस     [ १ ]   नाग  गले   बाघम्बर डारे   हनुमत       संग वीर बलधाम । डमरू  बाजे घोर  शोर ब्रज   चमकत  धेनू  लाल    ललाम । बाबा  तेरे  पाम  परों हौं     जावो तुम  निज प्यारे     धाम । बारो  लाला …

श्रीगोपाल गोकुल नन्द भवन आगमन कीर्तन रस माधुरी

गोकुल आगमन नंदभवन कीर्तन रस माधुरी खुले किबारे पौरी बाबा  पौढ़ी  बेसुध   जसुदा      बाम    । पौढ रही  नवजात  ललनिआ  सुंदर  रूप  राशि  अभिराम। गौ ग्वाले सब बेसुध सोमें   नन्दभवन  शान्ती  सुखधाम । बाबा  नन्द अचेतननिद्रा  चकित वसू लख  दृश्य तमाम  । लला पुढ़ाय  लली  लै   लीनी  मंजूसा  रख  …

श्रीकृष्ण मथुरा जन्म गोकुलगमन

कारागार प्राकट्य गोकुल गमन धरा अवतरण  धरा बचावन      कारागार  खुलइया   स्याम    । बेरी खुलीं दौन अपढारी           वासुदेव   विस्मय    संग बाम  । रूप चतुरभुज  दीने  दरशन   तात  मात मन       पूरन काम   । भगतन बन्ध निबारन हारे   मुकती मुक्त करैया      …

श्री गोपाल बाल चरित कीर्तन रस माधुरी

श्री गोपाल बाल चरित कीर्तन रस माधुरी || गोपाल कीर्तन || श्रीकृष्ण  भजौ  श्रीकृष्ण कहो    श्रीकृष्ण   माधव    सार      है   । श्रीकृष्ण    कृपासागर  जगत        कृष्ण       कृपा        संसार  है      । श्रीकृष्ण     करुणा दयासागर         दयालू     दयावतार        …