Dheeraj Utkarsh धीरज उत्कर्ष

कट जायेंगे ये भी सभी जैसे कट गये हैं और भी । मिल जायेंगे फिर क्षण हंसी के होगी सुहानी भोर भी। न धैर्य खो न धर्म खो विचलित न होना और भी । जैसे कुछ न हो घटित विस्मृति दुखों का दौर भी । निशां घावों के भी मिटेंगे …