कृष्णा जय श्री कृष्णा हार नहीं जीत

जब जग सोता वे जगते हैं। सपने अपने वे गढ़ते हैं। मंजिल उनको ही मिलती है। जो मंजिल को चुनते हैं। प्रबल आकांक्षा प्रबल कर्म के राही बनकर। हटा मार्ग से अवरोधों को वे चुनचुन कर । कील गाढ़ते उन्नति की निज लक्ष्य गवाही। मंजिल को पाकर रहते हैं मंजिल …

कृष्णा जय श्री कृष्णा लक्ष्यवीर

जब जग सोता वे जगते हैं। सपने अपने वे गढ़ते हैं। मंजिल उनको ही मिलती है। जो मंजिल को चुनते हैं। प्रबल आकांक्षा प्रबल कर्म के राही बनकर। हटा मार्ग से अवरोधों को वे चुनचुन कर । कील गाढ़ते उन्नति की निज लक्ष्य गवाही। मंजिल को पाकर रहते हैं मंजिल …

कृष्णा जय श्री कृष्णा आशीर्वचन

कृपा कृष्ण की रहे साल भर उन्नति के शिखरों को छूलो। साधन बनें सुगमता से       लक्ष्य न तुम कोई भी भूलो। अपनी अपनी मंजिल पाओ आशीर्वाद हमारा है। दो हजार छह रहे याद ये दायित्व तुम्हारा है। दायित्व रहे याद तो सफलता चरण चूम लेगी। समृद्धि सोपान खुलेंगे …

krishna jai shree krishna कृष्णा जय श्री कृष्णा

कृष्ण कृष्ण कहता हूँ तो दिल भर आता है। गीता ज्ञान स्फुरित होता मन महकाता है। अन्यायों का प्रतिकार करुँ साहस लाता है। हार निराशा मैं आ श सूरज चमकाता  है। साहस बढ़ जाता मेरा बल बढ़ जाता है। केवल पाथ धरम का मुझे नजर आता है भाई बंधु न …

कृष्ण

नन्हे से प्यारे कृष्ण तू एक साल सयाना हो गया। छोड़कर निज कर्म अन्यंत्र सुत तू भो गया। ललचा रहे जग मैं तुझे सब सच नहीं सब झूंठ है। तलवार नहीं है वह क्षत्रिय की केवल उसकी मूंठ है। बिना खड्ग धारण किये रण किसने जीता है। ख्वाब देखना  भ्रम …

krishna prena punj

बहुत कह दिया जानकर निज गूढ़ज्ञान सार गह  लो इसे। बुरा लगे तो त्याग प्रिय जान अनर्गल प्रलाप भी  इसे। निश्चित नापते हैं मंजिल को वही जान लेते जीवन यही। कुशल तैराक पार लगते ही हैनहीं  डूब जातेमँझधार वही। काल भी किसी का मीत नहीं प्रबंधन से जीत लो इसे। …

कृष्णा जय श्री कृष्णा

आज का पुरुषार्थ ही तो कल का तेरा भाग्य है । प्रमाद आलस्य अकर्मता  हर हाल में त्याज्य है । साधना की राह गुपाल  नर  डूबते  केवल  वही । ताक में रहते हैं जो शायद उगल देगी   मही । लक्ष्य प्रति समर्पण होता है जिनका नहीं । दिग्भ्रमित अस्थिर भ्रमित …