कृष्णा जय श्री कृष्णा

आज का पुरुषार्थ ही तो कल का तेरा भाग्य है । प्रमाद आलस्य अकर्मता  हर हाल में त्याज्य है । साधना की राह गुपाल  नर  डूबते  केवल  वही । ताक में रहते हैं जो शायद उगल देगी   मही । लक्ष्य प्रति समर्पण होता है जिनका नहीं । दिग्भ्रमित अस्थिर भ्रमित …