Dheeraj Utkarsh धीरज उत्कर्ष

कट जायेंगे ये भी सभी जैसे कट गये हैं और भी । मिल जायेंगे फिर क्षण हंसी के होगी सुहानी भोर भी। न धैर्य खो न धर्म खो विचलित न होना और भी । जैसे कुछ न हो घटित विस्मृति दुखों का दौर भी । निशां घावों के भी मिटेंगे …

Jigyasu man जिज्ञासु मन

पूछूँ किसको में नमन करूँ । बोलो उसको में नमन करूँ । धर्मपाथ जिनके जीवन पथ  पग पग गोचर होता है । त्याग तपस्या साधक नर जो होश कभी न खोता है। पूछूँ किसको में नमन कह दो उनको मैं नमन करूँ । मानवता हितार्थ मनुज  जो इतिहास बना जाते …

मन की उलझन

मन करता है दे दूँ  सारा                     जो जीवन मैं पाया। मन भी बाँटूँ धन भी बाँटूँ                     बाँटूँ अपनी काया। ज्ञान ध्यान सब मिल बाँटों                निरमल …

सुहानी जिंदगी

[ १ ] अजीब सी कहानी सुहानी जिंदगी।  सार केवल करलो गोपाल बंदगी। नित नये खेल हमें खिलाती जिंदगी। बिगाड़ती सभी कुछ बिगड़ैल जिंदगी। सुधारती सभी फिर अनौखी जिंदगी। अपनों की भी याद भुलाती जिंदगी  । प्यारे प्यारे लोग मिलाती जिंदगी। बाधाओं की नींद उड़ाती जिंदगी। सतरंगी फुहारे  छुड़ाती  जिंदगी। …

——-:  बेटी  जग का भविष्य :———      —————————–

——-:  बेटी  जग का भविष्य :———      —————————–   बेटी है तो निश्चित कल है , सृष्टी पटल का मंत्र अटल है ।  मानवता का   ये संबल है , संजीवनी  जीवन मंगल है ।               बेटी बिना  सृजन  अधूरा,              ग्यान …

परिचावली महान भक्त कविराज तुलसीदास

बाँदा जनपद मैं बसत राजा पुर  शुभ गांव । हुलसी नारि सुहावनी द्विजवर आत्माराम  । श्रावण शुकली सप्तमी घुटी घटा चहुंओर । गरजें बादल चमकें चपला दादुर पपिहा शोर । कविराज के  जन्म को औसर आयौ जान  । रामचंद्र चरनन कृपा आये श्री हनुमान    । रुदन शिशु कीनों नहिं …

रक्षाबंधन

रक्षा बंधन  पर्व मनाएं । रक्षाबंधन उत्सव अदभुत संबंधों के स्पंदन का । कच्चे धागे का बांकापन भाई के संकल्पन का। परम सनातन  प्रथा पुरातन प्रेम पूर्वक जकड़न का । सहज समर्पण निश्चय पक्का बहना के अभिनंदन का । प्रेम बंध हम बंध जाएँ । रक्षा बंधन पर्व मनाएं    …

Mahakavi sidhabhakt tulsidas

बाँदा जनपद मैं बसत राजा पुर  शुभ गांव । हुलसी नारि सुहावनी द्विजवर आत्माराम  । श्रावण शुकली सप्तमी घुटी घटा चहुंओर । गरजें बादल चमकें चपला दादुर पपिहा शोर । कविराज के  जन्म को औसर आयौ जान  । रामचंद्र चरनन कृपा आये श्री हनुमान    । रुदन शिशु कीनों नहिं …

Fag kamna

जलें बुराई मन अंतर्मन पर्व होलिका पावन । जलें भ्रांति जीवन संशय सब  जलें विचार अपावन । दुराग्रह हठबंध जलें सभी     ज्वाला पावन दाह न  । जलजाय सब रूढ़िवादिता ज्ञानमार्ग शुभ कारण । होली सतरंगी वर्षा जग रंग जाये रंगायन । रंग बिरंगे तन मन हों रंग बिरंगे हों …