गोपाल दोहै सफलता मूल मंत्र साहस

[ १ ] साहस उन्नति मूल जग         , साहस विजय अधार। बिन साहस का जीवनों           ,      बिन  हारेहू  हार । अर्थ :—– साहस उन्नति की जड़ है ।और साहस ही विजय प्राप्त करने का रास्ता है।  बिना साहस के मनुष्य का …

गोपाल दोहे साधु संत महिमा

[ १ ] ज्यों पावस ऋतू होंत , जग नदी नाल स्नान। अपढारे संतन चरण  ,     मान प्रभू  वरदान। अर्थ :—— जैसे वर्षा ऋतू आने पर संसार के सभी नदी नाले अपने आप पानी से भर जाते हैं ।उनका स्नान अपने आप ही हो जाता है ।अपने आप मिलने …

गोपाल – दोहे

इष्ट शोभा रस माधुरी     गोपाल दोहे से साभार   [ १   ] कनक बैनु मेंहदी रची     , अरुण तिलक प्रभु  भाल  । बसन बसंती सुघड़ दिपै  ,    मोरमुकुट  वनमाल  । अर्थ :– सोने की वंशी है ,मेंहदी रची है । मस्तक पर लाल तिलक  लगा है । परिधान …