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  ——-     ऊँ    गणपतये   नमः      ——-   ऊँ वक्रतुण्ड़ महाकाय    सूर्य कोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरू मे देव,       सर्व कार्येषु सर्वदा।             श्री कृष्ण शरणम ममः “श्रीराधे सर्वेश्वरी विजयते”                  ” वन्दे कृष्णम जगत गुरू “   अखण्डमण्डलाकारं  व्याप्तं येन चराचरम् ।  तत्पदं दर्शितं येन      तस्मै श्रीगुरवे नमः ॥    अज्ञानतिमिरान्धस्य ज्ञानाञ्जनशलाकया।    चक्षुरुन्मीलितं येन   तस्मै श्रीगुरवे नमः ॥    गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः    गुरुर्देवो महेश्वरः ।    गुरु साक्षात्  परंब्रह्म तस्मै श्रीगुरवे नमः। कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन। मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते …

गोपाल महादेव शंकर

     ऊॅ त्रयम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।  उव्र्वारूकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्।। स्तुति कैलाशी  कैलाश  गिरि           ,   आसन दीन  जमाय    । डमरू      बजै    त्रिशूल पै      , बैठे      ध्यान    लगाय    । बैठे ध्यान लगाय सामने          …