prerak preran प्रेरक प्रेरण

नहीं कठिन कुछ भी इस जग में तेरे हित निर्मित संसार । कर्मवीर कर कर्म अनूठे डलवाते निज गल में हार । अभिनंदन वीरों का होता एवम जग में वंदन भी । असफल लोग ढूंढते बहाने करते व्यर्थ में क्रंदन भी । छोटे छोटे कदम साध कर जो नर बढ़ते …

प्रेरक प्रेणन

सोने वाले जाग जरा तेरी रेल निकलने वाली है। हर स्टेशन बिन पैसेंजर चली जा रही खाली है। त्यागी जिसने सुख नींद नहीं। उसको सीट मिलेगी नहीं। जो अवसर को भुना न सका उसकी कीर्ति बढ़ेगी नहीं। उद्यम हीन नरन की जग मैं होती बदहाली है .। प्रति छन प्रतिपल …

ओजवान

योद्धा घबराये ना करते खोजा करते निज मंजिल को   । क्यों विजय श्री का वरण नहीं बारीकी देखें प्रतिपल को.। रणभूमि मैं नुकसानों की  भरपाई सब करने को। तत्पर मचलाया करते    रणचंडी रंग भरने  को। लालायित वो रहते हैं निज इतिहास बदलने को। प्रबल पराक्रमी बन कर प्रबल पराक्रम करने को   …

धन तेरस शुभकामना

धनवान नहीं  धन कामी हूँ कामना धन मन रखता हूँ । धन तेरस हर बार मनाता हूँ मांग सपर्पित  करता हूँ । कर्ज बहुत है मर्ज बहुत  धन देवी सुमरण करता हूँ । मेरा मेरे देश देश जन में   सबकी   अर्जी रखता हुँ । मालदार हों सकल नागरिक माला चरणों …

कृष्णा जय श्री कृष्णा

आज का पुरुषार्थ ही तो कल का तेरा भाग्य है । प्रमाद आलस्य अकर्मता  हर हाल में त्याज्य है । साधना की राह गुपाल  नर  डूबते  केवल  वही । ताक में रहते हैं जो शायद उगल देगी   मही । लक्ष्य प्रति समर्पण होता है जिनका नहीं । दिग्भ्रमित अस्थिर भ्रमित …

Dheeraj Utkarsh धीरज उत्कर्ष

कट जायेंगे ये भी सभी जैसे कट गये हैं और भी । मिल जायेंगे फिर क्षण हंसी के होगी सुहानी भोर भी। न धैर्य खो न धर्म खो विचलित न होना और भी । जैसे कुछ न हो घटित विस्मृति दुखों का दौर भी । निशां घावों के भी मिटेंगे …

मैदान मत छोडो

मैदान कभी भी मत छोडो यह कायरता का लक्षण है। कर्म क्षेत्र मैं डटना ही तो  जीवन कला विलक्षण है। जब राहें ऊबड़ खाबड़ हों। दुरगम हो चढ़ना मंजिल पै। हो सुख सुबिधा की नाकाफी दुखों का जोर हो वृद्धि पै। १। जब चिंता तुमको खाती हो मुस्कराते संगी साथी हो। …

Jigyasu man जिज्ञासु मन

पूछूँ किसको में नमन करूँ । बोलो उसको में नमन करूँ । धर्मपाथ जिनके जीवन पथ  पग पग गोचर होता है । त्याग तपस्या साधक नर जो होश कभी न खोता है। पूछूँ किसको में नमन कह दो उनको मैं नमन करूँ । मानवता हितार्थ मनुज  जो इतिहास बना जाते …

मन की उलझन

मन करता है दे दूँ  सारा                     जो जीवन मैं पाया। मन भी बाँटूँ धन भी बाँटूँ                     बाँटूँ अपनी काया। ज्ञान ध्यान सब मिल बाँटों                निरमल …