श्रीकृष्ण मथुरा जन्म गोकुलगमन

कारागार प्राकट्य गोकुल गमन धरा अवतरण  धरा बचावन      कारागार  खुलइया   स्याम    । बेरी खुलीं दौन अपढारी           वासुदेव   विस्मय    संग बाम  । रूप चतुरभुज  दीने  दरशन   तात  मात मन       पूरन काम   । भगतन बन्ध निबारन हारे   मुकती मुक्त करैया      …

श्री गोपाल बाल चरित कीर्तन रस माधुरी

श्री गोपाल बाल चरित कीर्तन रस माधुरी || गोपाल कीर्तन || श्रीकृष्ण  भजौ  श्रीकृष्ण कहो    श्रीकृष्ण   माधव    सार      है   । श्रीकृष्ण    कृपासागर  जगत        कृष्ण       कृपा        संसार  है      । श्रीकृष्ण     करुणा दयासागर         दयालू     दयावतार        …

गोपाल युगलकृष्ण श्रृंगार भाव भंगिमा

                         [  १  ] अपलक निरखत लाड़ली             ,   जसुदा नन्द कुमार  । रूप लखै   रूपेश्वरी                     ,   राधे कीर्ति कुमारि     । राधे कीर्तिकुमारि   करै अति …

गोपाल युगलकृष्ण सौंदर्य बर्णन

                                           [ १ ] शीश मुकुट नैना ,रुचिर      , उर सोहै   वनमाल। श्री राधे  सर्वेश्वरी             ,सर्वेश्वर    नंद लाल। सर्वेश्वर नंद लाल …

गोपाल दोहै सफलता मूल मंत्र साहस

[ १ ] साहस उन्नति मूल जग         , साहस विजय अधार। बिन साहस का जीवनों           ,      बिन  हारेहू  हार । अर्थ :—– साहस उन्नति की जड़ है ।और साहस ही विजय प्राप्त करने का रास्ता है।  बिना साहस के मनुष्य का …

गोपाल दोहे साधु संत महिमा

[ १ ] ज्यों पावस ऋतू होंत , जग नदी नाल स्नान। अपढारे संतन चरण  ,     मान प्रभू  वरदान। अर्थ :—— जैसे वर्षा ऋतू आने पर संसार के सभी नदी नाले अपने आप पानी से भर जाते हैं ।उनका स्नान अपने आप ही हो जाता है ।अपने आप मिलने …

गोपाल – दोहे

इष्ट शोभा रस माधुरी     गोपाल दोहे से साभार   [ १   ] कनक बैनु मेंहदी रची     , अरुण तिलक प्रभु  भाल  । बसन बसंती सुघड़ दिपै  ,    मोरमुकुट  वनमाल  । अर्थ :– सोने की वंशी है ,मेंहदी रची है । मस्तक पर लाल तिलक  लगा है । परिधान …

धनदेवी महालक्ष्मी वंदना

 [ १ ]             जय समुद्रजा   जय  कमलनैनी , जय  विष्णुप्रिया  चंद्राननी ।            मायाप्रदाती      सुख प्रदाती ,   जय जगत नारायण  ,संगिनी ।  धन ईश  जय   बैभव प्रदाती  ,    जय   सुयश   प्रदाती पदिमिनी।         तम …

गोपाल बजरंग वंदना

  अष्ट सिद्धि नवनिध  जग दाता   जय हो जय हो तेरी             । फाल्गुन सखा गुपाल  सहारे      भर दो  झोली  मेरी          ।   गद्य अर्थ :—-   हे मनुष्य को सभी आठ   सिद्धियां अणिमा  महिमा गरिमा लघिमा  प्राप्ति पराक्रम्य  इसतव  वसित्व तथा नौनिधियों हादी कादी वायुमन सिद्धि मदलसा कनकधर  प्रक्य साधना  सूर्यविज्ञान …