प्रिया प्रिय प्रथम मिलन रस माधुरी

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प्रिया प्रिय प्रथम मिलन रस माधुरी
स्वपन  न   अलि   हौं    स्याम    तिआरौ     ।
गली सांकरीन चलि हौं आनौं       ,    प्रेम लाड़ली  भारौ       ।
जीनों  प्रिया  भयऊ  ब्रज आपद  ,   जप  तप कीनों  भारौ    ।
कीरत   कीरत  सुता  अनूपा    ,     रूप गुनन    ,मन धारौ  ।
मात   तात  धैनू  मित   छांड़े      गह्यौ  आन  निरप   द्वारौ ।
भानुनंदिनी   लखि  सुखपाबौं          बूढूं   देउ      किनारौ   ।
”गुपाल”  चरन   राधिके     दासा       मोहन  नाम   हमारौ   ।
हिंदी  भावार्थ  : —
 हे सखियौ मैं  तुम्हारा स्यामसुंदर कृष्ण  हूँ ये वास्तविकता  है यह
कोई स्वप्न नहीं है।मैं बरसाने की संकरी [ कम चौड़ी  ] गलियों
से श्रीराधिके  और आप सभी के प्रेमवश मोह के वशीभूत होकर
आया हूँ। प्रिय सखीयौ  ब्रज मैं श्रीराधिके  की तपस्या जप के
कारण मेरा   जीना कठिन हो गया है ।  कीर्तिकुमारी  की कीर्ति
बहुत ही शुभ हैं उनके रूप गुणों को अपने मन मैं धारण कर मैं
उनकी तरफ आकर्षित हो गया हूँ। मैंने अपने माता पिता मित्र
गायों को छोड़कर राजा ब्रषभानु के दरवाजे पर आ गया हूँ। मैं
      श्री वृषभानु की लाडली बेटी श्री राधिके के  प्रेम मैं डूबा जा रहा हूँ
  हे सखीयौ मुझे डूबने से बचालो। मेरा नाम मोहन है मैं राधिके
के चरणों का सेवक हूँ ।